Thursday, June 18, 2009

मेरे आज से जुदा ख्वाब

एक दाल से बिखरे एक शाख से टूटे,
तेरे पहलू में ठहरे तेरी बाहों में सिमटे,


उम्मीदों से बंधा एक हल्का सा dhaaga हकीकत का,
तेरे हौसलों से जुदा एक रिश्ता मेरी ज़रूरत का,
एक इरादे की चाह में, एक ख्वाब की तमन्ना में,
मेरे हर पल की ख्वाहिश तेरी चाहत से लिपटे।
एक दाल से.................................................


वो तेरे दोस्तों के आगे तेरा मुझे दबी निगाह से छेड़ना,
वो चुप के मुझे ख़ुद की मौजूदगी का एहसास कराना,
एक शैतान सी मुस्कराहट, एक चुभती सी निगाह,
वो मुझे आघोष में भरना मेरे नज़दीक आके।
एक दाल से...................................................

1 comments:

alpha said...

waah-waah.......bohot khoob....

just hope tht "एक दाल" is strong enough,a bit too much hanging from it...:-)

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